सरकार और संगठन में राहुल की सर्वोच्चता साबित
अरुण खरे
शुक्रवार की दोपहर जो राजनीतिक चक्रवात प्रेस क्लब आॅफ इंडिया के परिसर से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बयान के बाद उठा था वह पूरे 124 घंटे तक समूची यूपीए सरकार और उसकी नेता कांग्रेस को हिलाने के बाद बुधवार की शाम सात बजे शांत हो गया। छह दिन के इस महामंथन के बाद तमाम भ्रष्टाचारों के आरोपों से धिरी कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का माद्दा रखने वाले मिस्टर क्लीन नेता के रूप में निखर कर सामने आ गए है। दागी सांसदों को बचाने के लिए लाया गया अध्यादेश व विधेयक सचमुच कूड़े के ढेर में बदल गया। शुक्रवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के मीडिया प्रमुख अजय माकन की प्रेस कांफ्रेंस में एकायक पहुँच कर यूपीए सरकार के अध्यादेश को बकवास बताते हुए उसे फाड़कर कूडे में फेंकने लायक कह कर प्रधानमंत्री और संगठन की सर्वोच्चता को चुनौती दे डाली थी। इस पूरे घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि राहुल गांधी इसी मिस्टर क्लीन की चमकदार छवि के साथ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार राजनीति में मंजे और तपे हुए नरेंद्र मोदी से दो-दो हाथ करने के लिए पूरी तरह तैयार हो गए हैं।
शुक्रवार के राहुल गांधी के बयान और तेवर देखने के बाद देश भर की नजरें प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की स्वदेश वापसी और उनकी प्रतिक्रिया पर टिकी थी। लेकिन वही हुआ जो देश के लोगों को पहले से ही नजर आ रहा था। हरिभूमि ने भी सोमवार को यह लिखा था कि प्रधानमंत्री की स्वदेश वापसी पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नाराज प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उनसे अपने किए की माफी मांग सकते है और प्रधानमंत्री भी हमेशा की तरह सब कुछ भूल कर कैबिनेट की बैठक बुलाकर अध्यादेश वापस लेकर कांग्रेस के युवराज की सर्वोच्च के दावे पर अपनी मुहर लगा सकते है और हुआ भी ठीक ऐसा ही। इन छह दिनों के घटनाक्रम से एक बात तो साफ हो गयी है कि कांग्रेस अध्यक्ष भले ही श्रीमती सोनिया गांधी हो लेकिन संगठन की बागडोर अब पूरी तरह राहुल गांधी के हाथ में आ चुकी है और संगठन कैसे चलाया जाएगा इस पर उनकी ही अंतिम मुहर अब मान्य होगी। कांग्रेस उपाध्यक्ष के इस कदम और समूची पार्टी के उनके पीछे आ खड़े होने ने उन्हें आगामी लोकसभा चुनाव का नेता अपने आप ही सिद्व कर दिया है। कांग्रेस ने भले ही भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल गांधी के नाम का ऐलान न किया हो लेकिन अपनी राजनीतिक पारी में पहली बार किसी राजनीतिक मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी निर्णायक प्रतिक्रिया देकर राहुल गांधी ने अपनी नई भूमिका से पर्दा उठा दिया है।
अरुण खरे
शुक्रवार की दोपहर जो राजनीतिक चक्रवात प्रेस क्लब आॅफ इंडिया के परिसर से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बयान के बाद उठा था वह पूरे 124 घंटे तक समूची यूपीए सरकार और उसकी नेता कांग्रेस को हिलाने के बाद बुधवार की शाम सात बजे शांत हो गया। छह दिन के इस महामंथन के बाद तमाम भ्रष्टाचारों के आरोपों से धिरी कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का माद्दा रखने वाले मिस्टर क्लीन नेता के रूप में निखर कर सामने आ गए है। दागी सांसदों को बचाने के लिए लाया गया अध्यादेश व विधेयक सचमुच कूड़े के ढेर में बदल गया। शुक्रवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के मीडिया प्रमुख अजय माकन की प्रेस कांफ्रेंस में एकायक पहुँच कर यूपीए सरकार के अध्यादेश को बकवास बताते हुए उसे फाड़कर कूडे में फेंकने लायक कह कर प्रधानमंत्री और संगठन की सर्वोच्चता को चुनौती दे डाली थी। इस पूरे घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि राहुल गांधी इसी मिस्टर क्लीन की चमकदार छवि के साथ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार राजनीति में मंजे और तपे हुए नरेंद्र मोदी से दो-दो हाथ करने के लिए पूरी तरह तैयार हो गए हैं।
शुक्रवार के राहुल गांधी के बयान और तेवर देखने के बाद देश भर की नजरें प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की स्वदेश वापसी और उनकी प्रतिक्रिया पर टिकी थी। लेकिन वही हुआ जो देश के लोगों को पहले से ही नजर आ रहा था। हरिभूमि ने भी सोमवार को यह लिखा था कि प्रधानमंत्री की स्वदेश वापसी पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नाराज प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उनसे अपने किए की माफी मांग सकते है और प्रधानमंत्री भी हमेशा की तरह सब कुछ भूल कर कैबिनेट की बैठक बुलाकर अध्यादेश वापस लेकर कांग्रेस के युवराज की सर्वोच्च के दावे पर अपनी मुहर लगा सकते है और हुआ भी ठीक ऐसा ही। इन छह दिनों के घटनाक्रम से एक बात तो साफ हो गयी है कि कांग्रेस अध्यक्ष भले ही श्रीमती सोनिया गांधी हो लेकिन संगठन की बागडोर अब पूरी तरह राहुल गांधी के हाथ में आ चुकी है और संगठन कैसे चलाया जाएगा इस पर उनकी ही अंतिम मुहर अब मान्य होगी। कांग्रेस उपाध्यक्ष के इस कदम और समूची पार्टी के उनके पीछे आ खड़े होने ने उन्हें आगामी लोकसभा चुनाव का नेता अपने आप ही सिद्व कर दिया है। कांग्रेस ने भले ही भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल गांधी के नाम का ऐलान न किया हो लेकिन अपनी राजनीतिक पारी में पहली बार किसी राजनीतिक मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी निर्णायक प्रतिक्रिया देकर राहुल गांधी ने अपनी नई भूमिका से पर्दा उठा दिया है।
03Oct-2013

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