मोदी की आंधी से
बिहार में राजग की शरण गहने की होड़
अरुण खरे
ठंड की दस्तक के
साथ गर्म हो रही मोदी की हवाओं ने देश की चुनावी फिजां की रंगत बदलना क्या शुरू
किया तमाम छोटे दल और मुख्यधारा से छिटके राजनीतिक नेताओं ने रंग बदलना शुरू कर
दिया है। इस दौड़ में बिहार कहीं आगे दिख रहा है। लग·fग
स·fe सत्ताओं
का स्वाद चख चुके लोकजनशक्ति पार्टी के सुप्रीमो रामविलास पासवान के कदम भी इस गर्म
हवा ने डिगा दिए हैं।
इसी माह होने
वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और अगले
साल होने वाले लोकसभा चुनाव की सरगर्मियों ने राजनीतिक दलों को अपने समीकरणों को
बदलने के लिए पूरी जमीन तैयार कर दी है। क·fe
बिहार के किंग रहे राष्ट्रीय जनता पार्टी के प्रमुख लालू यादव के चारा घोटाले
में जेल जाने के बाद जहां उनकी ताकत बढ़ती दिख रही है वहीं राजग से नाता तोड़ने वाले
जद यू की हवा बिहार में खराब होती जा रही है इसे भाँप
कर वहां के राजनीतिक दलों को लगने लगा है कि वे मोदी के नाम पर आंधी में बदल रही
हवा का दामन थाम कर चुनावी वैतरणी पार कर सकते है इसी के चलते बिहार के राजनीतिक
दलों में राजग का दामन थामने की एक प्रतिर्स्पधा सी शुरू हो गयी है अनेक राजनीतिक
नेता किसी न किसी तरह भाजपा नेताओं से अपने पुराने संपर्को का हवाला देकर
नए समीकरण बनाने में जुट गए हैं।
सूत्रों के
मुताबिक कभी जनता दल से सांसद रहे और जद यू से नाता तोड़ चुके
पूर्व सांसद उपेंन्द्र कुशवाहा ने एक पार्टी राष्ट्रीय
लोकसमता पार्टी का गठन किया था उनके साथ एक पूर्व सांसद अरुण कुमार भी है इन्होंने तो वाकयदा पिछले दिनों नालंदा में
अपनी पार्टी की कार्यकारिणी में राजग से नाता जोड़ने का प्रस्ताव तक पास कर लिया।
सूत्र बताते हैं कि ·ffजपा में ·fe
इनको साथ लेने की चर्चा शुरू हो गयी है। एक अन्य जद यू के महासचिव रहे और अब एक नई
पार्टी के मुखिया शम्भूशरण श्रीवास्तव भी मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं ये भी राजग के साथ जाने की लाइन में लग गए हैं। श्रीवास्तव ने तो राजग के संयोजक रहे
जार्ज फ र्नांडिस के पुराने सहयोगियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इनकी
पार्टी के सूत्रों का दावा है कि जद यू के कई नेता भी इनके संपर्क में है और वे भी राजग के साथ ही चुनावी मैदान में उतरना चाहते
हैं। इसके लिए इन्होंने समता मंच का ·fe
गठन किया है।
सूत्रों का दावा
है कि कांग्रेस की यूपीए सरकार को बिना शर्त समर्थन कर रहे लोजपा के प्रमुख
रामविलास पासवान भी इन दिनों राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरी नजर रखे हुए
हैं। राजद के लालू प्रसाद यादव का हश्र देखकर धर्मनिरपेक्षता की बांसुरी बजा रहे
रामविलास पासवान के कदम भी लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद डगमगाने
लगे हैं। पिछले पांच साल से लगातार यूपीए दो को बिना शर्त समर्थन दे रहे रामविलास
पासवान चाहते हैं कि कांग्रेस में उन्हें और उनके पुत्र को संरक्षण मिले । सूत्रों
का दावा है कि पिछले चार साल से वे यही कोशिश कर रहे थे लेकिन कांग्रेस का दिल
नहीं पसीजा वहीं उनकी पार्टी के नेताओं को भी
अब लगने लगा है कि लालू के जेल जाने के बाद लालू की मदद से थोड़ी बहुत चल रही उनकी
दुकान का भी शटर गिरने वाला है परिणाम यह है कि पासवान पर यह
दबाव बढ़ने लगा है कि वे मौके का लाभ उठाए और भाजपा के नेतृत्व वाले राजग एक बार फिर दामन थाम कर
चुनाव वैतरणी को पार करें।
जोलपा के सूत्र
बताते हैं कि रामविलास पासवान भी चाहते तो यही है
कि किसी न किसी तरह राजग में उनकी वापसी हो जाए लेकिन उनके सामने सबसे बड़ा संकट यह
है कि जिस गुजरात और मोदी की वजह से उन्होंने राजग को अलविदा कहा था उसे ही कैसे
स्वीकार कर लें? पासवान के बेहद करीबी सूत्रों का मानना है कि
पासवान चाहते तो यही है कि वे अब कांग्रेस
से हाथ छुटा कर राजग में चले जाए उन्हें राजग से परहेज भी नहीं है लेकिन मोदी के उस मुद्दे से कैसे पीछा
छुडाएं जिसकी वजह से उन्होंने राजग छोड़ा था। हालांकि अब पार्टी के कुछ नेता इस
सवाल पर कि जिस गुजरात दंगे के मुद्दे पर लोजपा ने राजग छोड़ी वे पुन: उसी में
शामिल हो जाएंगे? इस सवाल पर एक नेता का कहना है कि लोजपा ने
गुजरात के दंगा मुद्दे पर नहीं वरन अन्य राजनीतिक कारणों से राजग से नाता तोड़ा था।
इस जबाव से तो साफ है कि पासवान कांग्रेस से निराश हो कर या कांग्रेस पर दबाव
बनाने के लिए अब लोजपा के राजग का हाथ थामने की चिंगारी को हवा दे रहे हैं। यहां
सवाल उठता है कि 2002 गुजरात दंगों के कारण राजग से नाता तोड़ने वाले
रामविलास पासवान अपने और अपने पुत्र जिसे वे राजनीति में लाना चाहते हैं के लिए
कांग्रेस में बर्थ तलाश रहे हैं या कांग्रेस से पूरी तरह निराश होकर राजग का दामन
थाम अपनी राजनीतिक हैसियत को किसी न किसी तरह बनाए रखना चाहते हैं। उधर उप्र में भी कई दल भाजपा
का दामन का थामने की कोशिशों में जुट गए है। सूत्रों की मानें तो कई बड़े मुसलिम
नेता भी भाजपा से संपर्क साधने की कवायद में जुट गए हैं।
18Oct-2013

